सबब पूछते हैं लोग अकेले पन का ,
कोई किया जाने साये की तरहां मेरे साथ रहता है वोह !
उस के बदन की नज्देकियां नहीं मिलती सालों तक ,
मेरी रूह को छूता है वोह !
जन्मों से उस की आवाज़ सुनने को तरसती थी ,
पर अब तो हर रोज़ दिल की बातें करता है वोह !
कोई किया जाने मुझ से क्या क्या बातें करता है वोह !
समां जाता है मेरी नस नस में, दौर्ड़ता है मेरी रग रग में ,
कोई किया जाने मुझ से किस कदर गुल मिलता है वोह !
यह झूट है की में उस के बिना नहीं रह सकती,
सच्च तो यह है की मेरे बिना नहीं रहता है वोह !
उसकी ज़िंदगी हूँ में उसकी हर ख़ुशी हूँ में ,
खो जाती हूँ में पागल उसकी बातों में ,
पिघल जाती हूँ में उसकी साँसों में ,
कोई किया जाने किस दौर से चाहता है वोह !
अगर वोह झूट है तो सच्च नहीं है कुछ भी यहाँ ,
बस इक हकीकत है वोह !
छोड़ दूँ किस लिये खुवाबों की दुनिया ,
वोह जो जिस में नहीं है वोह !
कोई क्या जाने मरी दुनिया है वोह!
जुदा हैं हम इक दुसरे से ज़माने की निगाहाओं में,
कोई लमहा नहीं ऐसा के अलग मुझ से है वोह!
न मिले शाइद उम्र भर वोह!
मगर यह सच्च है ज़माने के उसकी हूँ में,
और मेरा है वोह!
न कोई पूछे सबब मेरी तन्हाई का ,
कियूं के हर घर्ड़ी हर पल मेरे साथ रहता है वोह !
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